सबसे खूबसूरत स्री के नाम से विख्यात आम्रपालि के असली माता-पिता कौन है कोई
भी नहीं जनता. आम्रपालि का नाम आम्रपालि इसीलिय पड़ा क्यूंकि वह किसी व्यक्ति को आम
के पेड़ के नीचे पड़ी मिली थी और उसी व्यक्ति ने आम्रपालि का पालन पोषण किया।
आम्रपालि जैसे जैसे बड़ी होती गई उसकी सुंदरता के चर्चे पुरे वैशाली राज्य में होने
लगे. आम्रपालि अत्यंत सुन्दर और सर्वगुण सम्पन थी। उसकी सुंदरता को देखकर राज्य के
सभी पुरुष उस पर मोहित हो उठते थे, परन्तु इतना सुन्दर और
आकर्षित रूप होने के बावजूद भी वह किसी की पत्नी नहीं बन सकी लेकिन पूरे नगर की
नगरवधु जरूर बन गई। सबसे सुन्दर स्री ‘आम्रपालि’ को अपनी सुन्दरता की
कीमत वैश्या बनकर चुकानी पड़ी. परन्तु आम्रपालि ने राज्य
में शांति बनाए रखने के लिय स्वंय के जीवन को दांव पर लगा दिया। उसने कई बरसों तक वैश्या बनकर वैशलि राज्य के धनवान व्यक्तियों का
मनोरंजन किया लेकीन एक समय ऐसा आया जिसने सबसे सुन्दर स्री ‘आम्रपालि’ के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया, जब वह बुद्ध के संपर्क
आई तो सबकुछ छोड़कर भिक्षुणी बन गई।
आखिर एक भिक्षुक ने कैसे
बदला सबसे सुन्दर स्री ‘आम्रपालि’ का जीवन
वैशाली राज्य में आम्रपालि का एक महल भी था। एक दिन एक भिक्षुक भिक्षा मांगने
उसके द्वार पर आया, जब आम्रपालि ने उस भिक्षुक को देखा तो वह उसे देखति ही रह
गई और सबसे सुन्दर स्री होने के बावजूद भी वह उस भिक्षुक के प्रेम में पड़ गई।
भिक्षा देते हुए आम्रपालि ने भिक्षुक से कहा -"तीन दिन के बाद वर्षाकाल
प्रारंभ होने वाला है, और मैं चाहती हूँ की आप उन दौरान मेरे महल में
ही रहें। " भिक्षुक ने अपना उत्तर देते हुए कहा इसके लिए मुझे अपने स्वामी
बुद्ध से अनुमति लेनी होगी।
वैशाली
राज्य में आम्रपालि का एक महल भी था। एक दिन एक भिक्षुक भिक्षा मांगने उसके द्वार
पर आया, जब आम्रपालि ने उस भिक्षुक को देखा तो
वह उसे देखति ही रह गई और सबसे सुन्दर स्री होने के बावजूद भी वह उस भिक्षुक के प्रेम में पड़ गई। भिक्षा देते हुए आम्रपालि ने भिक्षुक से कहा -"तीन
दिन के बाद वर्षाकाल प्रारंभ होने वाला है, और मैं चाहती हूँ की आप उन दौरान मेरे महल में ही रहें। " भिक्षुक ने
अपना उत्तर देते हुए कहा इसके लिए मुझे अपने स्वामी बुद्ध से अनुमति लेनी होगी।
भिक्षुक की तपस्या को भांग करने के लिय ‘आम्रपालि’ के प्रयत्न
जब भिक्षुक सबसे सुन्दर स्री ‘आम्रपालि’ के महल में रहने गया तो आम्रपालि ने सारी कोशिश
की उसकी तपस्या भंग करने की परन्तु आम्रपालि उसकी तपस्या को भंग नहीं कर
पाई। 4 महीने के बाद जब भिक्षुक
वापिस अपने गुरु के पास आया तो आम्रपालि भी उसके साथ बुद्ध के पास गई और बुद्ध को
कहा की मैंने आपके शिष्य की तपस्या को भंग करने के अनेक प्रयत्न किए पर आपका शिष्य अपने पथ
से बिलकुल भी नहीं भटका, कृप्या कर मुझे आप अपनी
शरण में ले लिजिय, यह सुन कर गुरूजी ने उसे
भी अपनी शरण में ले लिया और आम्रपालि सबसे सुन्दर स्री के साथ-साथ सबसे प्रशिद्ध भिक्षुक भी बन गई जिसके कारण उसका जीवन पूरी तरह से बदल
गया।
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