दुनिया के सात अजूबे ऐसे अद्भुत प्राकृतिक और मानव निर्मित संरचनाओं का संकलन है, जो मनुष्य को आश्चर्यचकित करती हैं. प्राचीन काल से वर्त्तमान काल तक दुनिया के अजूबों की ऐसी कई विभिन्न सूचियाँ तैयार की गयी हैं. प्राचीन काल की कलाकारी एक अद्भुत उदाहरण हैं और जिन्हें देख कर बहुत आश्चर्य होता है.
प्राचीन काल में दुनिया के सात अजूबे
- गीज़ा के पिरामिड
- बेबीलोन के झूलते बाग़
- ओलम्पिया में जियस की मू्र्ति
- अर्टेमिस का मन्दिर
- माउसोलस का मकबरा
- रोडेस कि विशालमूर्ति
- ऐलेक्जेन्ड्रिया का रोशनीघर
प्राचीन समय में यह इमारतें और स्मारक दुनिया के सात अजूबों की श्रेणी में सबसे ऊपर थी. 21वीं शताब्दी में दुनिया के सात अजूबों की श्रेणी को संशोधित किया गया क्यूंकि इनमें से अधिकांश पुरानी इमारतें नष्ट हो चुकी है. गीज़ा के पिरामिड अभी भी सात अजूबों की श्रेणी में सम्मिलित हैं. 2001 में स्विस कारपोरेशन न्यू 7 वंडर्स फाउंडेशन ने दुनिया भर में 200 स्मारकों और इमारतों के बीच 7 सर्वश्रेष्ठ स्मारकों को चुनने की एक मुहिम चलायी. सात अजूबों को चुनने के लिए दुनिया भर से वोटिंग हुई. उस समय गीज़ा के पिरामिड को एक सम्माननीय प्रतिभागी मान कर प्रतियोगिता से अलग कर दिया गया. न्यू 7 वंडर्स फाउंडेशन के अनुसार उस समय लगभग 100 मिलियन लोगो ने इस परियोजना के लिए अपने वोट फ़ोन और इंटरनेट से दिए. वोटिंग 2007 तक चली और लिस्बन में 7 जुलाई, 2007 को दुनिया के 7 अजूबे की घोषणा की गयी.
21वीं शताब्दी में दुनिया के सात अजूबे
- ताजमहल
- चीन की विशाल दीवार
- चीचेन इट्ज़ा
- कोलोसियम
- क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा
- माचू पिच्चू
- पेत्रा
ताजमहल:- भारत के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मक़बरा है. इसका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने, अपनी पत्नी मुमताज़ की याद में करवाया था. ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया है.
चीन की विशाल दीवार:- चीन की विशाल दीवार मिट्टी और पत्थर से बनी एक किलेनुमा दीवार है जिसे चीन के विभिन्न शासको के द्वारा उत्तरी हमलावरों से रक्षा के लिए पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर सोलहवी शताब्दी तक बनवाया गया। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की इस मानव निर्मित ढांचे को अन्तरिक्ष से भी देखा जा सकता है. यह मानव निर्मित दीवार 4000 मील तक फैली है.
चीचेन इट्ज़ा:- मेक्सिको में बसी चीचेन इट्ज़ा नामक इमारत दुनिया में माया सभ्यता की गौरवपूर्ण काल की गाथा गाती है. इस सीढ़ीदार पिरामिड का आधार चौकोर है और चारों ओर से शीर्ष पर स्थिति मंदिर के लिए हर तरफ 91 सीढ़ियां हैं। हर सीढ़ी एक दिन का प्रतीक है और मंदिर 365वां दिन.
कोलोसियम:- इटली देश के रोम नगर के मध्य निर्मित रोमन साम्राज्य का सबसे विशाल एलिप्टिकल एंफ़ीथियेटर है. यह रोमन स्थापत्य और अभियांत्रिकी का सर्वोत्कृष्ट नमूना माना जाता है.यह एक विशाल खेल स्टेडियम है जिसमें 50,000 लोग गुलामों और जानवरों की खुनी लड़ाई देखते थे.
क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा:- ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में स्थापित ईसा मसीह की एक प्रतिमा है जिसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आर्ट डेको स्टैच्यू माना जाता है. यह प्रतिमा अपने 9.5 मीटर (31 फीट) आधार सहित 39.6-मीटर (130 फुट) लंबी और 30-मीटर (98 फुट) चौड़ी है. इसका वजन 635 टन (700 शॉर्ट टन) है और तिजुका फोरेस्ट नेशनल पार्क में कोर्कोवाडो पर्वत की चोटी पर स्थित है 700-मीटर (2,300 फुट) जहाँ से पूरा शहर दिखाई पड़ता है.
माचू पिच्चू:- दक्षिण अमेरिकी देश पेरू मे स्थित एक कोलम्बस-पूर्व युग, इंका सभ्यता से संबंधित ऐतिहासिक स्थल है. 15वीं शताब्दी में सतह से 2430 मीटर के ऊपर बना यह शहर अपने आप में ही एक अजूबा है.
पेत्रा:- जॉर्डन के म’आन प्रान्त में स्थित एक ऐतिहासिक नगरी है जो अपने पत्थर से तराशी गई इमारतों और पानी वाहन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है. इस इमारत में रेत से इमारतों पर सुंदर नक्काशी की गयी है.आधुनिक युग में यह एक मशहूर पर्यटक स्थल है.
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